नतीजे पर सबसे ज़्यादा असर किसका होता है
कुछ सालों की अवधि में, ब्याज दर से कहीं ज़्यादा फ़र्क मासिक जमा से पड़ता है। 5 साल तक हर महीने ₹2,000 यानी कुल ₹1,20,000 जमा; 4% सालाना पर यह लगभग ₹1,33,000 हो जाता है, यानी ब्याज से करीब ₹13,000 जुड़ते हैं। जमा रकम दोगुनी करने से लगभग ₹1,33,000 और जुड़ जाते हैं; जबकि दर दोगुनी करके 8% करने से सिर्फ़ करीब ₹15,000 जुड़ते हैं। लंबी अवधि में दरें मायने रखने लगती हैं, इसीलिए जल्दी शुरुआत करना फ़ायदेमंद है।
कौन-सी दर डालें
वह दर डालें जो आपका खाता आज असल में देता है, टैक्स से पहले: आपके बैंक या बचत खाते की दिखाई गई APY (सालाना प्रभावी दर)। बचत की दरें अक्सर बदलती हैं, और परिवर्तनशील दरें गिर भी सकती हैं, इसलिए दर बदलने पर हिसाब फिर से चलाएं। यहां शेयर बाज़ार का रिटर्न न डालें: शेयर कोई तय दर नहीं देते और गिर भी सकते हैं।
योजना को टिकाए रखें
- पहले खुद को भुगतान करें: ट्रांसफ़र सैलरी आने के अगले दिन के लिए सेट करें, महीने के आख़िर के लिए नहीं।
- पैसे को एक नाम दें: रकम और तारीख वाला लक्ष्य (“कार, ₹6,00,000, जून”) सिर्फ़ “बचत” से ज़्यादा आसानी से निभता है।
- इसे सुरक्षित रखें: इसे अपने रोज़मर्रा के खाते से अलग, डिपॉज़िट इंश्योरेंस वाले खाते में रखें (भारत में DICGC के तहत, हर बैंक में ₹5 लाख तक)।
पूरी गाइड पढ़ें: पैसे कैसे बचाएं, और हर महीने कितना बचाएं। अगर अभी आपके पास कोई सुरक्षा कवच नहीं है, तो इमरजेंसी फ़ंड कैलकुलेटर से शुरुआत करें।
इस कैलकुलेटर के बारे में
जमा रकम हर महीने की शुरुआत में गिनी जाती है और ब्याज हर महीने चक्रवृद्धि (कंपाउंड) होता है। असली खाते ब्याज रोज़, हर महीने या हर साल जमा कर सकते हैं, और ब्याज पर टैक्स भी लग सकता है, इसलिए नतीजे को अनुमान मानें। आप जो भी टाइप करते हैं, वह आपके ब्राउज़र से बाहर नहीं जाता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस कैलकुलेटर में ब्याज चक्रवृद्धि (कंपाउंड) होता है?
हां, हर महीने: हर महीने के ब्याज पर अगले महीने ब्याज मिलता है। आपके बैंक का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है, जिससे नतीजे में कुछ रुपये का फ़र्क आता है, पूरी तस्वीर नहीं बदलती।
₹1,00,000 बचाने में कितना समय लगेगा?
बिना ब्याज के, हर महीने ₹2,000 से 50 महीने। अपने आंकड़े और ₹1,00,000 का लक्ष्य डालकर देखें कि आपकी दर से ठीक किस महीने पहुंचेंगे।
क्या मुझे अपनी सैलरी बढ़ोतरी भी शामिल करनी चाहिए?
बुनियादी योजना में नहीं। आज की जमा रकम से हिसाब चलाएं, फिर जब सैलरी बढ़े, तो मासिक रकम बढ़ा दें: जल्दी लक्ष्य पूरा करने का यही सबसे तेज़ तरीका है।