50/30/20 नियम कैसे काम करता है
यह नियम एलिज़ाबेथ वॉरेन और अमेलिया वॉरेन त्यागी की किताब All Your Worth (2005) से आया है, जहां इसे “Balanced Money Formula” (संतुलित पैसा फ़ॉर्मूला) कहा गया है। यह टैक्स के बाद की आमदनी पर लागू होता है, यानी वह पैसा जो सच में आपके खाते में आता है:
- 50% ज़रूरतों के लिए: वह सब, जो कल आपकी आमदनी बंद हो जाए तब भी आपको चुकाना ही होगा। किराया या होम लोन की EMI, बिजली-पानी, किराना, बीमा, काम पर आने-जाने का खर्च, कर्ज़ की न्यूनतम किस्तें।
- 30% इच्छाओं के लिए: रेस्टोरेंट, सब्सक्रिप्शन, छुट्टियां, बुनियादी ज़रूरत से ज़्यादा कपड़े।
- 20% बचत और अतिरिक्त कर्ज़ चुकाने के लिए: इमरजेंसी फ़ंड, रिटायरमेंट, न्यूनतम से ज़्यादा भरकर कर्ज़ जल्दी चुकाना।
एक उदाहरण
हर महीने ₹64,000 की इन-हैंड आमदनी: ज़रूरतें ₹32,000, इच्छाएं ₹19,200, बचत ₹12,800। अगर सिर्फ़ किराया ही ₹28,000 है, तो ज़रूरतें 50% से ऊपर चली जाएंगी, और नियम बताता है कि यह अंतर कहां से पूरा करें: पहले इच्छाओं से, बचत से नहीं।
जब यह बंटवारा फ़िट न बैठे
यह नियम एक मोटा अंदाज़ा (रूल ऑफ़ थंब) है, किसी रिसर्च का नतीजा नहीं। हमें ऐसी कोई स्टडी नहीं मिली जो जांचती हो कि यह काम करता है या नहीं। आम तौर पर दिक्कत घर के खर्च की होती है: इंग्लैंड में औसत प्राइवेट किराया मीडियन सकल आय का 36.3% ले जाता है, और लंदन में 41.6% (ONS, 2025)। चूंकि ये आंकड़े सकल (टैक्स से पहले की) आय पर मापे गए हैं, इन-हैंड आमदनी में किराए का हिस्सा और भी ज़्यादा होता है।
अगर आपकी ज़रूरतें 50% से ज़्यादा हैं, तो यह तरीका मत छोड़िए। अपना खुद का बंटवारा तय करें (60/20/20 या 70/20/10 आम विकल्प हैं, पर ये भी रिसर्च पर आधारित नहीं हैं), और एक सिद्धांत पक्का रखें: बचत पहले होती है, महीने की शुरुआत में — महीने के आख़िर में जो बचे, उससे नहीं।
पूरे तरीके के लिए पढ़ें 50/30/20 नियम, आसान भाषा में। अगर आप अपने हर रुपये का हिसाब पहले से तय करना पसंद करते हैं, तो देखें ज़ीरो-बेस्ड बजट।
इस कैलकुलेटर के बारे में
सारी गणना आपके ब्राउज़र में होती है। आप जो भी टाइप करते हैं, वह न कहीं भेजा जाता है, न सेव होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
50/30/20 नियम सकल आय पर लागू होता है या नेट आय पर?
नेट, यानी टैक्स के बाद की आय पर: वह पैसा जो असल में आपके हाथ आता है। सकल आय लेने से हर लक्ष्य उस रकम से बड़ा दिखता है जो आप सच में खर्च कर सकते हैं।
कर्ज़ की किस्तें किस हिस्से में गिनें?
न्यूनतम किस्तें ज़रूरतों में आती हैं। न्यूनतम से ऊपर आप जो भी चुकाते हैं, वह 20% वाले बचत और कर्ज़ चुकाने के हिस्से में गिना जाता है।
अगर मेरी ज़रूरतें 50% से ज़्यादा हों तो?
जहां किराए ज़्यादा हैं, वहां ऐसा होना आम है। पहले इच्छाओं में कटौती करें, बचत की कोई रकम ज़रूर रखें, भले वह छोटी हो, और आमदनी या किराया बदलने पर बंटवारे को फिर से देखें।